खरीफ की बोवनी: बीज को भूली सरकार : माकपा
भोपाल। जून माह के आगमन से ही मानसून प्रदेश में दस्तक दे सकता है। पहली बारिश के साथ ही प्रदेश में खरीफ की फसल की बोवनी भी शुरू हो जाएगी, लेकिन प्रदेश भर में किसान अभी से बीजों के लिए भटक रहे हैं और सरकार चुनावों के बाद जीत हार के गणित में उलझ गई है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि मालवा निमाड़ का किसान कपास के बीज के लिए अभी से भटक रहा है। प्रदेश भर की बात करें तो धान, सोयाबीन, मक्का, बाजरा, ज्वार, कोदों, कुटकी, तुअर और उड़द की फसलों के लिए किसानों को बीज चाहिए और सरकार हाथ पे हाथ धरे बैठी है।
माकपा नेता ने कहा है कि हद तो हद तो यह है कि नियमानुसार अप्रैल के अंत तक ही कृषि विभाग यह योजना बना लेता है कि इस वर्ष खरीफ की कौन कौन सी फसल के लिए क्या लक्ष्य रखा गया ह। उस रकबे के अनुसार ही बीज की व्यवस्था की जाती है। भाजपा की नई नवेली सरकार के गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि अभी तक कृषि विभाग खरीफ की फसलों के लिए लक्ष्य ही निर्धारित नहीं कर पाया है।
जसविंदर सिंह ने कहा है कि इससे सिर्फ किसानों के लिए बीज की अफरा तफरी ही नहीं मचेगी, बल्कि नकली बीज बेचने वाली कंपनियों का कारोबार भी पनपेगा। वे कालाबाजारी से किसानों को बीज बेचकर अपनी तिजोरियां भरेंगे। बाद में भलें ही वह बीज चाहे अंकुरित ही न हो, या फिर उस पर फल फूल न आएं।
माकपा नेता ने कहा है कि सरकार की इस लापरवाही को इस नजरिए से भी देखा जाना चाहिए कि यह बीज कंपनियों की सरकार के साथ सांठगांठ का परिणाम भी हो सकता है। अन्यथा यह कैसे हो सकता है कि खरीफ की फसल को लेकर सरकार के पास कोई योजना ही न हो?
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने बीज की कालाबाजारी रोकने, प्रमाणित बीज सरकार द्वारा किसानों को तुरंत मुहैया कराने की मांग करते हुए कहा है कि अब भाजपा प्रदेश सरकार को चुनावी जोड़ घटाने की मनोस्थिति से बाहर आकर किसानों के संकट को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
जसविंदर सिंह
9425009909
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