ऐ भूख तू अभी परेशान न हो शांत बैठ, रोटी के लिए नहीं मिलेगी मजदूरी, जिम्मेदार अफसर चुनाव में ब्यस्त हैं - जुगुल राठौर।
ऐ भूख तू अभी परेशान न हो शांत बैठ, रोटी के लिए नहीं मिलेगी मजदूरी, जिम्मेदार अफसर चुनाव में ब्यस्त हैं ---------- जुगुल राठौर।
जैतहरी, मोजर बेयर पावर प्लांट जैतहरी में काम किया मजदूर, मजदूरी के लिए दर-दर ठोकरें खाता घूम रहा हैं । श्रमिक वकील खान पिता नफील खान सहित कन्हैया लाल, मनोज राठौर, गेंदलाल राठौर ने, मोजर बेयर पावर प्लांट के ठेकेदार जेपी इंजीनियरिंग एंड बॉडीबिल्डिंग के नियोजन एवं देखरेख में 20 मार्च 2023 से 13 मई 2023 तक लगातार 12 घंटा काम किया है किंतु ठेकेदार जेपी इंजीनियरिंग के द्वारा आज दिनांक तक मजदूरों के मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
उक्त आशय की जानकारी संयुक्त ठेकेदारी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष जुगुल किशोर राठौर ने देते हुए बताया कि मजदूरों का मजदूरी भुगतान साप्ताहिक, पाक्षिक एवं मासिक होना कानून में उल्लेख है लेकिन कानून का राज्य चलाये जाने की बात करना अपराध हो गया है। हमारे जिम्मेदार अफसर जिनका की वेतन लाखों रुपए महीना के साथ साथ नाना प्रकार की सुविधाएं सहित ऊपरी आमदनी भी कोई कम नहीं होता वह बेरोजगार एवं भूखे लोगों की भूख को कैसे समझ पाते कि भूख की तड़फ क्या होती है।
श्रमिक वकील खान का कहना है कि रूम का किरायेदार किराया समय में नहीं मिलने के कारण कमरा खाली करवा दिया है ,और ऐसे मौका का फायदा उठाते हुए ठेकेदार के प्रतिनिधि अब मोल भाव पर उतारू हो गया कि वह ओवर टाइम का सामान्य कार्य के बराबर लेना है तो ले ले अन्यथा वह भी मिलने वाला नहीं है ।चूंकि मध्य प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू है कोई भी अधिकारी के पास मजदूर की बात सुनने का समय नहीं है । ऐसे हालात में मजदूर के पास अपना और अपने परिजनों के भूख को कैसे मनाएं यह सबसे बड़ी मुश्किल है। शिकायत पर कार्यवाही करते हुए श्रीमान श्रम पदाधिकारी जिला अनूपपुर के द्वारा कार्यालयीन पत्र क्रमांक 294 दिनांक 1 अगस्त 2023 को प्रबंधक मोजर बेयर पावर प्लांट को पत्राचार करते हुए भुगतान करवाए जाने हेतु निर्देशित किया गया था । किंतु श्रम पदाधिकारी के स्मरण पत्र जिसमें तीन दिवस के अवधि के भीतर भुगतान करने का आदेश जारी किया गया था वह अवधि कब समाप्त होगा, उनके अवधि समाप्त होने तक मजदूरों का भूख इन्तजार कर पाएगा या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। पर इतना जरूर है कि इस तरह का हालात इससे पहले मजदूरों के कभी नहीं देखा गया है।पत्र का भी प्रबंधन को कोई असर हो रहा है या नहीं शवाल के गर्भ में छिपा हुआ है ।
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