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बदल रही है युवाओं की सोच, चाहते हैं भय, भ्रष्टाचार मुक्त और विकासोन्मुखी समाज - उषा कोल

बदल रही है युवाओं की सोच, चाहते हैं भय, भ्रष्टाचार मुक्त और विकासोन्मुखी समाज - उषा कोल 

उमरिया /मध्यप्रदेश। उमरिया जिला मानपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आम आदमी पार्टी से उम्मीदवार भी है उषा कोल वर्तमान मे प्रदेश सचिव आम आदमी पार्टी से है जिनका मानना है, युवा शक्ति देश और समाज की रीढ़ होती है। युवा देश और समाज को नए शिखर पर ले जाते हैं। युवा देश का वर्तमान हैं, तो भूतकाल और भविष्य के सेतु भी हैं। युवा गहन ऊर्जा और उच्च महत्वाकांक्षाओं से भरे हुए होते हैं। उनकी आंखों में भविष्य के इंद्रधनुषी स्वप्न होते हैं। समाज को बेहतर बनाने और राष्ट्र के निर्माण में सर्वाधिक योगदान युवाओं का ही होता है। युवा बेहतर भविष्य के लिए मतदान के माध्यम से ईमानदार और विकासपरक सोच वाले प्रतिनिधि को चुनने और भ्रष्ट लोगों का सामाजिक दुत्कार को पहली सीढ़ी मानते हैं। समाज में तेजी से आ रहे बदलाव के प्रति बड़ी संख्या में युवाओं का नजरिया शार्टकट की बजाय कर्म और श्रम के माध्यम से सफलता प्राप्त करने की ओर होना जरूरी है।
किसी वर्ग को नहीं बल्कि युवाओं को समग्र विश्व का करना है उत्थान
स्वामी विवेकानंद की सोच थी किसी वर्ग विशेष को लेकर नहीं बल्कि समग्र विश्व को उत्थान की ओर ले जाना है। आज की बिगड़ती सामाजिक स्थिति में युवा पीढ़ी को उनके विचार आत्मसात करने की जरूरत है तभी युवा वर्ग समाज और देश को प्रगति की ओर ले जा सकेगा। युवा देश के कर्णधार हैं, अत: उन्हें यह जिम्मेदारी समझनी ही होगी। आज विश्वभर में अधिकतर युवा विलासिता और सुख-सुविधा को देखते हुए अपनी देश की जमीन को छोड़कर दूसरी जगह जा रहे हैं। जिससे राष्ट्र निर्माण में दिक्कतें आ रही हैं। युवा किसी भी राष्ट्र की शक्ति होते हैं और विशेषकर भारत जैसे महान राष्ट्र की ऊर्जा तो युवाओं में ही निहित है।

सबको आगे जाने की जल्दी है। इसके लिए छोटे रास्ते अपनाए जाते हैं, लाइनें टूटती हैं, नियम बिखरते हैं। नियमों को सुधारने के लिए आंदोलन हुए, लेकिन यह बात दूर तलक नहीं गई। वहीं आकर रुक गई, जहां से निकली थी। प्रश्न है कि क्या जो हो रहा है, उसे ऐसे ही होने दिया जाए। शायद नहीं, ऐसा आखिर कब तक चलता रहेगा। क्या हम ईमानदारी से भ्रष्टाचार से लड़ने की ताकत या नीयत रखते हैं। ऐसा अभी तो बिल्कुल दिखाई नहीं देता है। दरअसल भ्रष्टाचार तो हमारी आत्मा में बसा है। यह सौ फीसदी कड़वी सच्चाई है। यहां भ्रष्टाचार को सिर्फ आर्थिक ²ष्टिकोण से देखना गलत होगा। यह हमारे समाज, हमारे चरित्र, हमारी सोच और हमारे कर्म में रच-बस गया है। स्वयं में सुधार हम खुद ही ला सकते हैं। हम बदलेंगे, तो ही देश बदलेगा और तरक्की करेगा।

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