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कॉलरी कर्मचारियों के जेब में लोन के नाम पर डांका, दलालों के हाथ में है बैंकों की बागडोर! कोयलांचल क्षेत्र में दलालों का बोल बाला

कॉलरी कर्मचारियों के जेब में लोन के नाम पर डांका, दलालों के हाथ में है बैंकों की बागडोर!

अनुपपुर। अनुपपुर जिले के कोयलांचल क्षेत्र में जमुना कोतमा एरिया में कॉलरी कर्मचारियों के जेब में लोन के नाम पर डांका, दलालों के हाथ में है बैंकों की बागडोर!
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक के दलालों का बोलबाला है। खाता खुलवाने से लेकर ऋण लेने तक कमीशनखोरी और दलाली का उपभोक्ताओं को सामना करना पड़ता है। इसके बगैर उपभोक्ताओं को केवल आश्वासन ही हाथ लगता है काम नहीं होता।क्षेत्र में व्याप्त अव्यवस्था और दलालों की मध्यस्थता इस अभियान में खासा रोड़ा साबित हो रही है। आम आदमी को आज भी बैंक में छोटा से काम करने के लिए दांतों चने चबाना पड़ता है। वहीं यदि आम आदमी अथवा ग्राहक अथवा उपभोक्ता बैंक में बने भ्रष्टाचार के सिस्टम से आता है तो उसे किसी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि इसके लिए उसे सुविधाशुल्क के रूप में कुछ देना होता है ऐसे में जो काम उसका तुरंत और निशुल्क होना चाहिए वह नहीं हो पता। सरकार तमाम योजनाओं का लागू करती है लेकिन धरातल पर इन योजनाओं की हकीकत कुछ अलग ही दिखती है। वैसे भी जमा, निकासी, स्थानांतरण, ऋण अथवा कोई सूचना कुछ भी हो बैंक में हासिल करना टेढ़ी खीर है।

अत्यधिक काम के कारण बैंकों में भीड़ की भरमार रहती है और काम करने वालों की संख्या तुलना में कम होती है। यहीं नहीं बैंक के स्टॉफ का दुव्यवहार भी आए दिन समस्या खड़ी करता है। इनकी तुलना में निजी बैंकों की अच्छी सेवा लोगों में राष्ट्रीकृत बैंकों के प्रति धीरे-धीरे मोहभंग हो रहा है।
फिलहाल वह बैंक में किसी भी समस्या, कर्मचारियों की अभद्रता अथवा भष्टाचार की बात से कतराते हुए कहते हैं की ऐसा कुछ भी नही है।


कॉलरी क्षेत्र में बैंक के कैशियर और दलालों की मिलीभगत से जोरों पर दलाली का काम जारी है, किसी भी खातेदार के प्राइवेट निजी खाते से उसके लेनदेन और ट्रांजैक्शन को बैंक के कैशियर के द्वारा दलालों के माध्यम से बता दिया जाता है, जो कि बैंकिंग नियमों के विपरीत है, इतना ही नहीं सूदखोर और लोन के नाम पर भी इन दलालों के द्वारा जमकर उगाही की जाती है, और कमीशन लिया जाता है बताया जाता है कि इन दिनों बैंक में अधिकारी और कैसियर तो खाली नाम मात्र के लिए है, वह दलालों के इशारे पर नाचते रहते हैं ,बैंक प्रबंधन के इस कार्यप्रणाली से आम जनता, स्थानीय बैंक के ग्राहकों में रोष व्याप्त है, बात स्पष्ट है कि बैंक में दलाली प्रथा को रोकने की मांग भी भी कई बार की गई और यदि दलाली प्रथा बंद होती है तो बड़े पैमाने पर मिलने वाला कमीशन इन अधिकारियों और कर्मचारियों तक कैसे पहुंच पाएगा? कुल मिलाकर बैंक दलालों की इस समय कैशियर से सांठगांठ के कारण है ,खबर तो यह भी है कि इन दलालों और कैशियर की मिलीभगत से कई ग्राहकों के खाते से लाखों रुपए पार भी गए हैं, और खाता धारकों को पता भी नहीं चला।

कई मामले धोखा धडी के सामने भी आ चुके है विगत पिछले वर्ष सूदखोरी से लेकर बैंक में दलाली करने वाले कई लोगो पर कार्यवाही भी की गई थी हालांकि पुलिस अधीक्षक अखिल पटेल द्वारा जिले भर में लगातार ऐसी कार्यवाहिया लगातार देखने को मिलती थी लेकिन वर्तमान पुलिस अधीक्षक द्वारा कॉलरी कर्मचारियों के जेब में लोन के नाम पर डांका डालने वाले दलालों के ऊपर कोई भी कार्यवाही की खबर अभी तक न सुनाई दे रही है न किसी तरह की कोई चर्चा का विषय है अब देखना यह है की आने वाले समय में कोई कार्यवाही होती है या फिर स्थिति जस की तस रहती है।

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