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ठेका-श्रमिकों पर हो रहे शोषण व अत्याचार पर रोक लगाने हेतु RCWF ने पत्र जारी किया महाप्रबंधक,एस.ई.सी.एल, जमुना कोतमा क्षेत्र को


ठेका-श्रमिकों पर हो रहे शोषण व अत्याचार पर रोक लगाने हेतु RCWF ने पत्र जारी किया महाप्रबंधक,एस.ई.सी.एल, जमुना कोतमा क्षेत्र को

एवम् निकाले गए पुराने ठेका-श्रमिकों को पुनः काम में वापस रखे जाने बावत् , शर्ते अगर नही मानी गई तो हो सकता है आंदोलन 

 अनुपपुर - जमुना कोतमा// विषयांतर्गत लेख है जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत आमाडांड खुली खदान परियोजना में जब से कार्य प्रारंभ हुआ है तब से लेकर वर्तमान की स्थिति में लगातार ठेका-श्रमिकों का परियोजना में उत्पादन एवं समस्त कार्यों में अहम भूमिका एवं योगदान रहा है। परंतु प्रबंधन और ठेकेदार की मिलीभगत से ठेका श्रमिकों के साथ लगातार शोषण किया जा रहा है जो निम्न प्रकार से हैं –
1. नियमानुसार कार्य करने हेतु समय सीमा जो कि आपके ही सिस्टम के आधार पर 8 घंटे की ड्यूटी एवं महीने में 26 दिन कार्य होना चाहिए साथ ही हाजिरी टाइम ऑफिस में लगनी चाहिए परंतु ऐसा नहीं होता है 8 घंटे के बजाय 12-12 घंटे पूरे महीने बिना सप्ताहिक अवकाश के लिया जाता है।
2. कोल इंडिया, हाई पावर कमेटी के अनुसार ठेका श्रमिकों का वेतन जो वर्तमान में 1084 दैनिक होता है सिर्फ कागजों में दिया जाता है वास्तविक रूप में कभी नहीं दिया गया।
3. 18 फरवरी 2022 के राजपत्र में साफ-साफ उल्लेखित है कि ठेके में परिवर्तन होने पर पुराने ठेका श्रमिकों को नियोजन में प्राथमिकता दी जाएगी परंतु यहां नियोजित श्रमिकों को बिना नोटिस के बिना उचित कारण बाहर निकाल दिया जाता है।
4. सी.एम.पी.एफ,  व्ही.टी.सी., पी.एम.ई., बोनस आदि नियम अधिनियम कागजों तक ही सीमित है किसी श्रमिकों को इन का लाभ कभी नहीं मिला ।
              निम्न ठेका श्रमिक जैसे- जमुना प्रसाद केवट (ग्राम मलगा), लाल बहादुर केवट (ग्राम मलगा), सोभनाथ केवट (ग्राम आमाडांड) आदि श्रमिकों द्वारा शोषण का विरोध किए जाने पर उन्हें नेता हो नेतागिरी करते हो बोलकर काम से बाहर निकाल दिया गया। पिछले 10-12 वर्षों से लगातार समय-समय पर आपके पास एवं उप-क्षेत्रीय प्रबंधक आमाडांड एवं बरतराई से इस समस्या हेतु कई बार पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था एवं दिनांक 05-08-2022 को आमाडांड उप-क्षेत्रीय प्रबंधक के साथ बैठक में कुछ माँगो पर निम्नलिखित निर्णय लिए गए थे जो अभी तक लागू नहीं हुआ है जिसकी कॉपी संलग्न कर रहे हैं।
               अतः 24 घंटे की समय अवधि के अंदर समस्याओं का निराकरण करें अन्यथा श्रमिकों द्वारा किसी भी आवागमन पर रोक लगाया जाता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।

भवदीय

[ राजकुमार पूरी ]
महामंत्री
ठेका श्रमिक विंग ( R.C.W.F.)

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