तुम्हारे पास खोने को कुछ नहीं है और पाने को पूरी दुनिया है…दुनिया के मजदूरों तुम एक हो जाओ….1 मई मजदूर दिवस
तुम्हारे पास खोने को कुछ नहीं है और पाने को पूरी दुनिया है…दुनिया के मजदूरों तुम एक हो जाओ….
.मजदूर वे सभी हैं जो शारीरिक श्रम करें या ऑफिस में बैठकर फाइलों के बोझ तले दबे लोग मानसिक श्रम करते हुए जिंदगी गुजार देते हैं। 1 मई पूरे विश्व में मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूरे विश्व परिदृश्य में अनादि काल से मजदूर वर्ग जिस मुसीबत और भयंकर कष्टकारी जिंदगी जीता था उसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे एक उदाहरण अफ्रीका के नीग्रो लोगों की अमेरिका और यूरोपीय देशों में भेड़ बकरी सब्जी भाजी जैसे मंडी लगती थी जिसमें पुरुषों के साथ महिलाओं और लड़कियों को जैसे सब्जी भाजी भेड़ बकरी जैसे टटोलकर देखकर लिया जाता है वैसे आमानवीय ढंग से लेकर मजदूरी का काम बेदर्दी से कराते हुए गोरे लोगों के द्वारा उनका जमकर शारीरिक मानसिक दोनों तरह का शोषण किया जाता था और अधिकांश यह गुलाम रूपी मजदूर असमय दम तोड़ देते थे फिर बहुत सारी क्रांतियां हुई हम19वीं शताब्दी में यहा भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार से अंग्रेजों द्वारा गन्ने की खेती हेतु गिरमिटिया मजदूर के रूप में मारीशस, सुरीनाम ,फीजी और अन्य अफ्रीकी देशों में इनको पानी के जहाज में भेड़ बकरी जैसा भरकर ले जाया गया और जिस मुसीबत और कठिनाई से हमारे पूर्वजों ने जिंदगी गुजारी उसको सुनकर आपकी आंखों से अविरल अश्रु धारा बह उठेगी। भले आज स्थिति दूसरी हो वहां भारतीयों की अच्छी खासी संख्या है और इनमें से कई उस देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के साथ अन्य महत्वपूर्ण पदों में काम किया है और कर रहे हैं। 1 मई मजदूर दिवस आज के परिपेक्ष में देखते हैं चाहे मौसम की मार हो या भीषण करोना कॉल इन्हें तो काम करना है।
वह तोड़ती पत्थर,, जिसे मैंने देखा इलाहाबाद के पथ पर,, कोई ना छायादार पेड़ जिसके तले बैठी हुई स्वीकार,,,, श्याम तन, भर बंधा यौवन ,,, नत नयन प्रिय कर्म रत मन,,,,,,,,, वह तोड़ती पत्थर,,,,, कितना मार्मिक मस्त मौला गरीबों के मसीहा फक्कड़ कवि निराला जी ने कैसी तस्वीर खींची है एक मजदूर महिला की जो आज भी जीवंत है।आइए हम सब मिलकर इन कर्म वीरो को नमन करते हैं।
Comments
Post a Comment