उस समय समुद्र के किनारे पर रामायण सीरियल की शूटिंग चल रही थी .. समुद्र के पास में ही एक छोटा सा गाँव था, उस गाँव के लोग कभी कभी रामायण की शूटिंग देखने आ जाते थे ...
एक दिन अचानक शूटिंग के दौरान उन्हें बहुत ज्यादा शोर सुनाई दिया.. जब गोविल जी (राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता) ने पूछा कि क्या हो गया है तो उन्हें बताया गया कि एक औरत है जो राम को ढूंढ रही है... वो औरत बहुत हड़बड़ी में आई और राम जी कहां हैं, राम जी कहां हैं चिल्लाने लगी.. सभी रामायण की शूटिंग में व्यस्त थे ..
महिला ने अपने बीमार बच्चे को रामजी के चरणों मे पटक दिया और जोर जोर से रोने लगी, रामजी मेरे बच्चे को बचा लो.. डॉक्टर्स ने भी हाथ खड़ा कर दिया है कि अब ये बचेगा नहीं... मर जाएगा.. आप भगवान हो, मेरे बच्चे को बचा लो ... प्रभु मेरे बच्चे को बचा लो ...🙏
सभी शूटिंग करने वाले हैरान होकर महिला की तरफ देखते रहे, कुछ समय के लिये शूटिंग रोक दी गई ..... जब महिला रामजी के सामने जोर जोर से रोने लगी, तब रामजी एक दम खड़े हो गए और बच्चे को देख कर आंखें बंद करके मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना की कि बच्चे के लिए जो कर सकें कर दें..
उसके बाद उस दिन महिला वहां से चली गई लेकिन तीन दिन बाद वो वापस उस सेट पर जब गोविल (राम का किरदार निभाने अभिनेता) से मिलने आई, तो उसका बच्चा उसके साथ उसकी उंगली पकड़ कर चल रहा था..
यह देखकर सभी शूटिंग करने वाले लोग दंग रह गए !
महिला का भाव देखो कि एक अभिनेता के अंदर प्रभु की शक्ति पैदा हो गई !
यह घटना खुद अरुण गोविल ने अपने मुँह से एक इंटरव्यू के दौरान सुनाई थी ....
जब सच्चे भाव और भावना से पत्थर में भगवान प्रकट हो सकते हैं तो व्यक्ति में क्यों नहीं.. कौन कहता सच्चे मन से पुकारे तो भगवान प्रकट नहीं होते.....
सियाराम मय सब जग जानी,
करहु प्रणाम जोर जुग पानी...!
जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ...।।
जय जय सियाराम 🙏

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