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इतिहास बन कर रह गया शिवलहरा धाम , विकास क्यों नहीं हो पाया प्राचीन काल की इस धरोहर का , नष्ट हो रहे प्राचीन काल के बने शैल चित्र

 इतिहास बन कर रह गया शिवलहरा धाम , विकास क्यों नहीं हो पाया प्राचीन काल की इस धरोहर का , नष्ट हो रहे प्राचीन काल के बने शैल चित्र  



अनुपपुर।जमुना कोतमा क्षेत्र के अंतर्गत भालूमाड़ा में स्थित शिवलहरा धाम।इतिहास बन कर रह गया शिवलहरा धाम विकास क्यों नहीं हो पाया प्राचीन काल की इस धरोहर का नष्ट हो रहे प्राचीन काल के बने शैल चित्र।स्थानीय लोगो का कहना है कि,अज्ञात वास् के लिए कई वर्ष पूर्व पांच पांडव यंहा रुके थे।और अपना अज्ञात वास् काटने के लिए यंही केवई नदी के किनारे पत्थरो को काटकर अपने रहने के लिए स्थान बनाया व पूजा के लिए मंदिरों का निर्माण किया। पांडव कालीन प्राचीन ऐतिहासिक पुरातात्विक धार्मिक एवं आम लोगों के लिए आस्था का स्थान है। इस स्थान पर पांडवों ने एक वर्ष अज्ञातवास के रूप में गुजारे थे। उसी समय की यहां पांडव कालीन गुफाएं व मंदिर हैं।हर महाशिवरात्रि पर यहां दर्शन के लिए लोग आते और यहां मेला लगता।शिव लहरा धाम में मेले की संपूर्ण जवाबदारी स्थानीय ग्राम पंचायत एवं जिला प्रशासन की होती है लेकिन वर्षों से देखने को मिला है कि मेला की जिम्मेदारी या मेला प्रबंधन केवल खानापूर्ति करते हुए ग्राम पंचायत को मेला में आए दुकानदारों यात्रियों से केवल वसूली की जाती है अन्य व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता।




 एतिहासिक युग के पांडव द्वारा बनाए गए दुर्लभ शैल चित्र बर्बाद होने की कगार पर हैं। जिस गुफा में यह शैल चित्र बने हैं वह पूरी तरह से खुली है और बरसात का पानी रिसकर अंदर पहुंचता है जिससे शैल चित्र खराब होने लगे हैं। यदि शैल चित्रों को  संरक्षित नहीं किया गया तो मानव इतिहास से जुड़ी यह अनूठी कृति कहीं कहानी बनकर न रह जाए। पुरातत्व विभाग ने इस गुफा के संरक्षण की योजना तो बनाई लेकिन इतने वर्षो में सिर्फ बोर्ड ही लग पाया।बता दें कि प्रागैतिहासिक काल में जब मानव गुफाओं में निवास करता था तब के मानव द्वारा बनाए गए शैल चित्र दुनिया में कई स्थानों पर पाए जाते हैं। शिवलहराधाम की गुफा में बने शैल चित्र भी काफी दुर्लभ माने जाते हैं। अब तक कई विद्वान इस पर शोध कर चुके हैं। पुरातत्व विभाग ने इस महत्वपूर्ण धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए आज तक ठीक व्यवस्था नहीं की है।गुफा पूरी तरह से खुली है और बरसात में बारिश रिसकर भीतर तक पहुंचता है जिससे धीरे-धीरे शैल चित्रों को नुकसान पहुंच रहा है। कुछ शैल चित्र खराब भी हो चुके हैें और उनका रंग बदलने लगा है। इस गुफा के बाहर एक स्थान पर आज तक गेट नही बन है बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण लोग आसानी से गुफा तक पहुंच जाते हैं। कुछ लोग गुफा के ऊपर बैठकर पिकनिक भी मनाते हैं और यहां तमाम तरह के कूड़ा आदि भी बिखरा रहता है।अपनी प्राचीन इतिहास के लिए जाना जाती है। ये गुफा दो वजहों से काफी प्रसिद्ध है। पहला कारण है इसका महाभारत काल से जुड़ाव और दूसरा इस गुफा में सबसे पुराने शैल चित्र का मौजूद होना।माना जाता है कि इस गुफा का संबंध द्वापर युग की महाभारत कथा से है। इसका नाम महाभारत काल के पांच पांडवों के नाम पर पड़ा है।इस मंदिर में पांडवों के द्वारा लिपि है जो आज तक कोई भी नही पढ़ पाया बड़ी दूर दूर से वैज्ञानिक आकर सर्च कर के जा चुके कहा जाता है कि इस लिपि को जो भी पढ़ लेगा ।जिस दीवार पे ये लिपि लिखी गई है वह दीवार खुल जाएगी।जिसके नीचे अनगिनत खजाना रखा हुआ है।लेकिन अभी तक कोई भी नही पढ़ पाया।
यंहा पर शिव जी की प्रतिमा स्थापित है। जिसके कारण समय समय पर लोगों का तांता लगा ही रहता है,और महाशिवरात्रि के दिन दो दिवसीय मेला लगाया जाता है।जिसमे बड़ी दूर दूर से लीग आते है।यंहा का मनोरम दृश्य व चट्टानों को काटकर बनाई गई मंदिर लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है।साथ ही 108 वर्षो से तक एक महिला रोज पूजा अर्चना करती साथ ही यंही रहती भी थी उनके भरण पोषण के लिए स्थानीय लोग आकर खाना पानी दे जाते थे अब विगत 7,8,वर्ष पूर्व उनका निधन हो गया !मिली हुई जानकारी यह कहती है कैसे भालूमाडा नाम पड़ा इस क्षेत्र का इसके साथ ही भालू की गुफाओं (माड़ा) की वजह से ही इस क्षेत्र का नाम भालूमाड़ा पडऩे की जानकारी दी जाती है साथ ही नदी में किस तरह खेतों और नालों से पानी आता है यह भी बताया जाता है नदी की संरचना के बारे में मास्टर ट्रेनरों द्वारा जानकारी दी जाती है मिट्टी के अपरदन, उसके संरक्षण में घास, झाड़, पौधे और पेड़ों की भूमिका, अनूपपुर इस क्षैत्र में पाए जाने वाले जंगली जानवरों, सांपों के बारे में भी बताया जाता है पांडवकालीन ऐतिहासिक शिवलहरा गुफाओं के बारे में जानकारी प्राप्त होती है  उसमें बने शैलचित्रों के बारे में कहानी को दर्शाता है। ऐसा इतिहास है इस क्षेत्र का लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी किसी भी तरह के विकाश कार्य नहीं हुए है कहने को तो कोतमा विधान सभा का यह क्षेत्र शहडोल संभाग का सांसदीय क्षेत्र भी है एक और बात की अनुपपुर जिले में नेताओ की कमी बिलकुन भी नहीं है अनुपपुर जिले में मंत्री जी भी रहते है उनके गृह ग्राम से लगभग 5 से 6 किमी की दूरी पर ही शिवलहरा धाम की प्राचीन काल की गुफाएं हैं मगर अफसोस की अभी तक कोई पहल नही की गई।








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